अपना आवाम
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मां चण्डी दाई की अलौकिक महिमा ! नीम पेड़ के नीचे विराजित हैं , जो जीवन को पवित्रता और उत्कृष्टता की दिशा में ले जाने की अद्भुत प्रेरणा देती हैं

 मुड़पार की माता चण्डी दाई !


मां चण्डी दाई की अलौकिक महिमा ! नीम पेड़ के नीचे विराजित हैं , जो जीवन को पवित्रता और उत्कृष्टता की दिशा में ले जाने की अद्भुत प्रेरणा देती हैं



जांजगीर-चांपा (अपना आवाम न्यूज)

जिलांतर्गत बम्हनीडीह ब्लॉक के अफरीद से मात्र एक किलोमीटर दूर मुड़पार गांव हैं । इस ग्राम में वर्षों पूर्व नीम के पेड़ में प्रकट हुई थी साक्षात् मां चण्डी दाई ! यहां के लोगों की ऐसी मान्यता हैं कि लगभग 108 वर्ष पहले तालाब से लगी हुई एक टीला था, जिसमें एक नीम का पेड़ था जिसकी जड़ से पीपल और नीम एक साथ उग आया था । गांव के लोग स्नान करके पूजा-अर्चना करते लगे और धीरे-धीरे इसकी मान्यता बढ़ने लगी । देखते-देखते श्रद्धालु भक्तों ने पेड़ पर एक छोटा-सा मंदिर स्थापित कर दिया और देवी की प्रतिमा स्थापित कर दी और नाम दे दिया मां चण्डी दाई !  ग्राम मुड़पार के समृद्ध कृषक कृष्ण कुमार पाण्डेय की पत्नी श्रीमति कुसुम पाण्डेय के आग्रह पर उनके सुपुत्र धर्मेन्द्र- श्रीमति ममता पाण्डेय ने चंडी देवी मूर्ति के अगल-बगल में नव दुर्गा की अलग-अलग मूर्ति स्थापित कर पूजा-अनुष्ठान शुरू की । देवी की नौं मूर्तियां हैं, जिन्हें नव दुर्गा कहा जाता हैं । इनके नाम हैं - शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा , स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महा गौरी और सिद्धिदात्री !  



*आदिशक्ति के नौं रुपों का दर्शन मां चण्डी मंदिर में* 



आदिशक्ति के नौं रुपों की स्तुति पाण्डेय परिवार ही नहीं बल्कि श्रद्धालु भक्त मंदिर में पहुंचकर चंडी मंदिर में करते हैं । इन देवियों की महिमा का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में भी वर्णित हैं । आसुरी शक्तियों से मुकाबला करने के लिए देवी की उत्पत्ति हुई और विभिन्न रुपों में किस तरह उन्होंने राक्षसों का वध किया इस संबंध में विभिन्न कथाएं हैं । मंदिर में देवी दाई के बगल में काली माता की खड़ी मूर्ति हैं और दोनों ओर मां जगदम्बा के नौं स्वरुपों की छोटी-छोटी मूर्ति की पूजा नवरात्रि के अतिरिक्त गांव की महिला और पुरुष रोज पूजा-अनुष्ठान करने आते हैं । 


*सबकी मुरादें पूरे करने वाली मां चण्डी दाई की विशेषताएं*


नीम के पेड़ में साक्षात् प्रकट हुई थीं मां चण्डी दाई ।


गांव के लोगों की मान्यता हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से प्रार्थना कर मन्नत मांगता हैं, वो अवश्य पूरी होती हैं ‌।


देवी दाई के बगल में काली माता की खड़ी मूर्ति हैं और दोनों ओर मां जगदम्बा के नौं स्वरुपों की दिव्य छोटी-छोटी मूर्तियां हैं ।


*पहली बार चैत्र नवरात्रि पर श्रीमद् देवी भागवत कथाएं*



 प्रिंट मीडिया के संपादकीय लेखक शशिभूषण सोनी ने बताया कि संपूर्ण सृष्टि को संचालित करने वाली आदिशक्ति मां जगदम्बा हैं । चैत्र नवरात्रि पर श्रीमद देवी भागवत की पावन कथा आत्म-निर्भरता और नव स्फूर्ति प्रदान करने वाली हैं । यहां पर भक्ति-भाव में लीन श्रीमति कुसुम पाण्डेय नित्य स्नान करने के बाद चंडी दाई की पूजा करने आती हैं और सायंकाल माता रानी को दीपक जलाकर भोग लगाती हैं । 


श्रीमति कुसुम पाण्डेय अम्मा जी की देखा-देखी गांव की महिलाएं नीम पेड़ के साथ चंडी देवी की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए तीज और करवा चौथ पर उपवास रखती हैं । भारतीय नववर्ष पर पाण्डेय परिवार के द्वारा चैत्र नवरात्रि में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन चंण्डी दाई मंदिर परिसर में किया जा रहा हैं । व्यासपीठ पर अंचल के कर्मकांडी पंडित श्रीकांत तिवारी जी हैं । चैत्र और क्वांर नवरात्रि के पावन अवसर पर इस मंदिर में माता के भक्तों के द्वारा मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं । श्रद्धाओं के अनुसार इससे मन की मुरादें पूरी होती हैं ।

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