अपना आवाम
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सनातन धर्म की सच्ची सुरक्षा, गृहस्थ धर्म के पालन में ही निहित हैं - राजेन्द्र शर्मा, कथा वाचक

 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज छठवां दिन

 

*सनातन धर्म की सच्ची सुरक्षा, गृहस्थ धर्म के पालन में ही निहित हैं - राजेन्द्र शर्मा, कथा वाचक* 




 जांजगीर-चांपा (अपना आवाम न्यूज)

जाने-अनजाने में भूल से भी कर या ज्ञान अथवा अज्ञान अवस्था में भी कर  लिया जाये तब भी हरिनाम कल्याणकारी हैं । वस्तु शक्ति कभी भी हमसे अपेक्षा नहीं रखती ,उसे हम माने या ना मानें उसका प्रभाव रहेगा ही ! जैसे आग को नहीं मानने 

पर भी वह जलाती हैं जहर नहीं मानने पर भी पीने से मारता हैं , विद्युत के आवेश को नहीं मानने पर भी उसे करेंट का झटका लगता ही हैं ठीक वैसे ही भगवान्नाम न मानने पर भी सभी पापों को नष्ट करता हैं , उक्त उद्गार सराफा बाजार, चांपा के सोनी परिवार में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने भगवन्नाम की महिमा का सरस वर्णन किया ।


*चतुर्थ दिवस की कथाएं* 


अंचल के सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य राजेंद्र महाराज द्वारा अजामिल ब्राह्मण की कथा सुनाई गई । अंत समय में पुत्र नारायण का नाम लेने से ही मुक्ति मिली।


*गजेन्द्र मोक्ष-* भगवान श्रीविष्णु जी के नाम स्मरण से ही ग्राह्य को मुक्ति मिली। 


*समुद्र मंथन की कथा -*

आचार्य श्री ने श्रीराम प्रसंग और श्रीकृष्णावतार एवं नंद उत्सव का विस्तार से वर्णन करते हुए समुद्र मंथन की कथा सुनाई । समुद्र मंथन के दौरान देव-दानवों दोनों ने बल लगाया । परंतु अमृत देवताओं को ही मिला।व, क्योकि उनका मन भगवान पर लगा हुआ था । स्वर्णकार समाज के मीडिया प्रभारी शशिभूषण सोनी ने बताया कि खचा-खच भरे हुए पंडाल में आचार्य श्री द्वारा कथा का वर्णन सुंदर ढंग से किया जा रहा हैं । वास्तव में अमृत उन्हें ही मिलता हैं जिसका मन भगवान पर लगा रहता हैं,माया पर नहीं । 

*वामन अवतार की कथा -* आचार्य श्री ने राजा बलि की कथा सुनाते हुए कहा कि सर्वस्व समर्पण करने पर भगवान दानदाता के ऋणी बन जाते हैं । राजा बलि की तरह हमेशा दानदाता की रक्षा भी करते हैं । भगवान वामन ने राजा बलि को पातालपुरी का राजा बनाया और उसकी रक्षा करने के लिए स्वयं भवन में द्वारपाल बने तथा हमेशा के लिए चिरंजीवी होने का वरदान देकर भगवान ने कहा की आठवी मन्वंतर में तुम इंद्र भी बनोगे l 


*श्रीराम और श्रीकृष्ण अवतार -* नवम स्कंध में व्यासपीठ पर विराजमान राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र मर्यादा की मूर्ति, गृहस्थ धर्म का पालन ही सनातन धर्म की सुरक्षा हैं ।कृष्ण जन्मोंत्सव पर बधाई गीतों के साथ श्रद्धालु भक्तों ने नाच-गाकर खुशियां मनाई । 


*वृद्धावस्था आने पर संपत्ति का नहीं बल्कि संतान का साथ चाहिए* 


आचार्य राजेन्द्र शर्मा की मधुर और रसमयी कथा परंपरा से भावी पीढ़ी संस्कारित हो रही हैं ।   शशिभूषण सोनी ने बताया कि वृद्धावस्था आने पर संपत्ति की नहीं बल्कि अपनी संतान का साथ चाहिए । भागवत कथा के चतुर्थ दिन कथा श्रवण करने वालों में मुख्यतः स्वर्णकार समाज के केंद्रीय अध्यक्ष जयदेव सोनी , भाजपा नेता कार्तिकेश्वर स्वर्णकार, शिक्षक सुरेश-वर्षा रानी सराफ  कोरबा,श्रीमति सुक्रिता , कन्हैया  कैवर्त्व , श्रीमति कविता खेमकरण देवांगन , किशोर,प्रदीप सोनी, राजकुमार , संजय , मधुसूदन सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल हुए ।

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