रहसबेडा प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा !
*बालक ध्रुव की कथा संकल्प से सिद्धि तक की कथा हैं - श्रद्धेय पंडित पवन कुमार पाठक*
जांजगीर-चांपा (अपना आवाम न्यूज)
राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को उसकी सौतेली मां सुरुचि ने गोद में बैठने से रोक दिया था । इसी अपमान से व्यथित होकर मात्र 5 वर्ष का अबोध बालक माता सुनीति की आज्ञा लेकर घने जंगल में तपस्या करने के लिए निकल पड़ा । उक्त उद्गार केशव सोनी परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान पंडित पवन कुमार पाठक ने कहा । श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन वार्षिक श्राद्ध निमित्त दिनांक 13 अप्रैल को कलश यात्रा निकालकर किया जा रहा हैं । कथा प्रतिदिन सायं 3 बजें से रात्रि 08 बजें तक किया जा रहा हैं ।
*ध्रुव ने परमेश्वर की गोद पाने 6 महिने तक कठोर तपस्या किया*
सप्त-दिवसीय कथा के दुसरे दिन अंचल के सुप्रसिद्ध कथाकार पंडित पाठक ने कहा कि संत-महात्माओं का दर्शन बड़े भाग्य से मिलता हैं । बालक ध्रुव तप करने निकला और रास्ते में ही नारद मुनि प्रकट हुए तथा नारद मुनि ने ही ध्रुव को परमेश्वर की गोद में स्थान प्राप्त करने का मार्ग सुझाया । नारद मुनि ने उन्हें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र करने को कहा । बालक ध्रुव ने लगातार 6 महीने कठोर तप किया । पहले फल-फूल फिर जल, फिर वायु और अंत में श्वास रोककर तपस्या करते रहे ।उसकी अनवरत तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने साक्षात् दर्शन दिए और उसे अटल ध्रुव पद का वरदान दिया ।
*श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र का सार*
स्वर्णकार समाज के मीडिया प्रभारी तथा अपना आवाम न्यूज़ के लेखक शशिभूषण सोनी ने बताया कि संत-महात्माओं का सान्निध्य सौभाग्य से मिलता हैं । नारद जी जैसे गुरु मिल जाएं तो राजा की गोद नहीं बल्कि सीधे भगवान की गोद मिलती हैं । अपमान को सीढ़ी बनाकर ध्रुव सदा-सर्वदा के लिए अमर हो गए ।
*श्रदालु भक्त प्रसन्न होकर भगवान की कथा सुनते रहे*
पंडित पवन कुमार पाठक ने सोनी परिवार द्वारा रहसबेड़ा प्रांगण, चांपा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन यही प्रसंग सुनाया । इस दौरान भक्त मंत्र-मुग्ध होकर प्रवचन सुनते रहे । कथा श्रवण के लिए सत्यनारायण सोनी, लक्ष्मी प्रसाद सोनी,शशिभूषण सोनी, रमेश कुमार सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

