अपना आवाम
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दूध से घी-पनीर, वर्मी कम्पोस्ट और हाथों से टोकरी-हर हुनर बन रहा आय का जरिया विभिन्न उत्पादों से बाजार में बना रहीं अपनी अलग पहचान

 लैलूंगा की महिलाओं ने खड़ा किया खुद का रोजगार

दूध से घी-पनीर, वर्मी कम्पोस्ट और हाथों से टोकरी-हर हुनर बन रहा आय का जरिया
विभिन्न उत्पादों से बाजार में बना रहीं अपनी अलग पहचान



रायगढ़

कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम-चोरंगा की महिलाएं  आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर संतोषी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने न केवल अपने हुनर को पहचाना, बल्कि उसे आय का मजबूत साधन भी बना लिया है।
करीब चार साल पहले समूह से जुड़ी इन महिलाओं ने छोटे स्तर से शुरुआत की थी, लेकिन आज वे विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। 

इस वर्ष से उन्होंने अपने काम को और विस्तार देते हुए गाय के दूध से घी, खोवा और पनीर बनाना शुरू किया है, जिससे उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है। खास बात यह है कि वे घर पर ही गाय का पालन कर स्वयं ही कच्चा माल तैयार करती हैं। यही नहीं, समूह की महिलाएं मिर्ची का स्वादिष्ट अचार भी बना रही हैं, जिसकी स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है। साथ ही वे वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का साधन भी मिल रहा है।

उनकी रचनात्मकता यहीं तक सीमित नहीं है। छिंद और सेवई घास जैसी पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग कर वे सुंदर और उपयोगी टोकरी भी तैयार कर रही हैं, जो ग्रामीण कला और आत्मनिर्भरता का अनोखा उदाहरण है। इन सभी गतिविधियों को सफल बनाने में जिला प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधनों की उपलब्धता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, जिससे वे आज अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं। आज लैलूंगा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में समूह की महिलाओं ने अपने सभी उत्पादों को प्रदर्शनी के रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया, बल्कि मौके पर ही उनका विक्रय कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को देखकर लोगों ने काफी सराहना की। चोरंगा की ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
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