महंगाई के खिलाफ एटक की हुंकार: बालको में गरजे मजदूर, सरकार को चेतावनी
बालको/कोरबा (अपना आवाम न्यूज)
छत्तीसगढ़ राज्य एटक कमेटी के आह्वान पर प्रदेशव्यापी ‘महंगाई विरोधी दिवस’ के तहत आज एल्यूमिनियम एम्प्लाइज यूनियन (एटक) ने बालको के परसाभाठा चौक पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया। सैकड़ों मजदूरों, आम नागरिकों व घरेलू महिलाओं ने भागीदारी कर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
*मुख्य वक्ता, एटक के राज्य महासचिव कामरेड हरिनाथ सिंह* ने कहा:
पिछले 42 महीनों से पेट्रोल-डीजल, अनाज, दाल, तेल, आटा, दूध, शिक्षा, एलपीजी व दवाइयों के दाम बेलगाम हैं। वेतन स्थिर है, लेकिन महंगाई की मार से मजदूर का परिवार चलाना दूभर हो गया है।
देश में 32 करोड़ युवा बेरोजगार सड़कों पर भटक रहे हैं, मगर सरकार ‘मस्ती में बंसी’ बजा रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, फिर भी प्रधानमंत्री जनता को ‘सोना न खरीदने’ और ‘पेट्रोल कम जलाने’ की नसीहत दे रहे हैं।
चार श्रम संहिताएं कॉरपोरेट घरानों को सौंपा गया मजदूरों का ‘मृत्युपत्र’ हैं। एनडीए सरकार 2024 में ‘महंगाई कम करेंगे’ का वादा कर सत्ता में आई, पर आज जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।
*बालको एटक महासचिव सुनील सिंह* ने कहा:
_‘महंगाई की मार, वेतन बीमार’_ — आज न्यूनतम वेतन ₹1100 से ₹13650 तक सिमटा है। इस भीषण महंगाई में श्रमिक का घर कैसे चलेगा? सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, प्राइवेट स्कूलों की फीस से गरीब के बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं। दवाइयों के दाम आग उगल रहे हैं। एक ओर प्रधानमंत्री ‘मेलोडी चॉकलेट’ बांट रहे हैं, दूसरी ओर शीर्ष पदों से बेरोजगारों को ‘कॉकरोच’ कहा जा रहा है। देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है, यह समझना होगा।
आज किसान, मजदूर, छात्र और आम जनता महंगाई, 4 श्रम कानूनों व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर है।
सभा को यूनियन के अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। अंत में महंगाई व केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी के साथ सभा का समापन हुआ।
मुख्य नारे:
1. _एटक की ललकार, महंगाई पर वार।_
2. _टैक्स घटाओ दाम घटाओ, वरना गद्दी छोड़ जाओ।_
3. _आटा-दाल सब्जी महंगी, गरीब की थाली खाली।_
4. _रसोई गैस हजार पार, चूल्हा कैसे जले सरकार।_
5. _महंगाई की मार, वेतन बीमार — न्यूनतम वेतन 26000 करो।_


